चार साल बाद नीलामी: 1 मार्च को शुरू होगी स्पेक्ट्रम की नीलामी, लेकिन 5जी स्पेक्ट्रम इससे बाहर

नई दिल्ली4 घंटे पहले

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  • स्पेक्ट्रम मिलने के बाद टेलीकॉम कंपनियों की सर्विस क्वालिटी सुधरने की उम्मीद
  • पूरे स्पेक्ट्रम की नीलामी हुई तो सरकार को कम से कम 3.9 लाख करोड़ रुपए मिलेंगे

सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों के लिए स्पेक्ट्रम नीलामी की तारीख तय कर दी है। यह 1 मार्च को शुरू होगी। इसमें 5जी स्पेक्ट्रम को शामिल नहीं किया गया है। इससे पहले पांच बार स्पेक्ट्रम नीलामी हो चुकी है। आखिरी नीलामी चार साल पहले हुई थी। कंपनियों की शिकायत रहती है कि कम स्पेक्ट्रम के कारण वे ग्राहकों को अच्छी सर्विस नहीं दे पाती हैं। ज्यादा स्पेक्ट्रम मिलने से सर्विस क्वालिटी सुधरने की उम्मीद है।

7 अलग फ्रीक्वेंसी वाले स्पेक्ट्रम की नीलामी होगी
नीलामी 700, 800, 900, 1800, 2100, 2300 और 2500 मेगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी वाले स्पेक्ट्रम की होगी। टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई ने दो साल पहले इनकी बेस प्राइस यानी कम से कम कीमत तय की थी। 700 मेगाहर्ट्ज वाला स्पेक्ट्रम सबसे महंगा है। कोई कंपनी पूरे देश के लिए इसे खरीदती है तो उसे बेस प्राइस पर 32,905 करोड़ रुपए देने पड़ेंगे। इसे प्रीमियम स्पेक्ट्रम माना जाता है। इसके सिग्नल 2100 मेगाहर्ट्ज वाले सिग्नल की तुलना में तीन गुना ज्यादा दूर तक जाते हैं।

3 तरह के स्पेक्ट्रम की नीलामी सभी 22 सर्किल के लिए होगी
पूरे देश में 22 टेलीकॉम सर्किल हैं। 700, 800 और 2300 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की नीलामी सभी 22 सर्किल के लिए, 1800 मेगाहर्ट्ज की 21 के लिए, 900 और 2100 मेगाहर्ट्ज की 19 के लिए और 2500 मेगाहर्ट्ज की 12 सर्किल के लिए होगी। सरकार ने 3300-3600 मेगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी बैंड वाले स्पेक्ट्रम को इस नीलामी से बाहर रखा है। ये स्पेक्ट्रम 5जी सर्विसेज के लिए बेहतर माने जाते हैं।

कंपनियों के पास एक साथ या किस्तों में पैसा देने का विकल्प
कैबिनेट ने 17 दिसंबर 2020 को 2,251.25 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की नीलामी के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। बेस प्राइस पर स्पेक्ट्रम की पूरी कीमत 3.92 लाख करोड़ रुपए बनती है। कंपनियों के पास पूरा पैसा एक साथ या किस्तों में देने का विकल्प होगा।

पूरे स्पेक्ट्रम के लिए कंपनियों के बोली लगाने पर संदेह
रेटिंग एजेंसी इक्रा का मानना है कि कंपनियां 30 से 50 हजार करोड़ रुपए के स्पेक्ट्रम ही खरीदेंगी। कंपनियों के पास अभी जो स्पेक्ट्रम है, उसका रिन्युअल भी करीब है। इसलिए वे रिन्युअल के लिए पैसे बचाएंगी। हो सकता है वोडाफोन-आइडिया नीलामी में हिस्सा ही न ले। क्रेडिट सुइस का आकलन है कि रिन्युअल पर एयरटेल के 15,000 करोड़ और रिलायंस जियो के 11,500 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

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