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मुंबई8 घंटे पहले

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देश में जल्दी ही नए स्टॉक एक्सचेंज खुल सकते हैं। मार्केट रेगुलेटर सेबी ने इसके लिए नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है और 5 फरवरी तक इस पर सुझाव मांगे हैं। सुझाव मिलने के बाद वह नियमों को अंतिम रूप देगा। नए एक्सचेंज खुलने से कंपटीशन बढ़ेगा। इसका फायदा आखिरकार निवेशकों को कम चार्ज के रूप में मिल सकता है।

तकनीकी दिक्कत है बड़ी वजह

सेबी ने कहा है कि समय के साथ-साथ भारतीय सिक्योरिटी मार्केट भी काफी बढ़ गया है। केवल 7 जनवरी को NSE पर 73 हजार करोड़ रुपए के शेयरों का ट्रेड हुआ। ऐसे में टेक्नोलॉजी की दिक्कतों और हालिया निगेटिव मार्केट इवेंट्स को देखते हुए मार्केट रेगुलेटर ने नए एक्सचेंज या डिपॉजिटरी की लॉन्चिंग की योजना बनाई है। 16 साल पहले NSE की लॉन्चिंग भी ऐसी ही परिस्थितियों में हुई थी।

नए एक्सचेंज से निवेशकों को होगा फायदा

नए एक्सचेंज के आने मार्केट में प्रतियोगिता बढ़ेगी, जिससे निवेशकों का ट्रेडिंग खर्च भी कम हो जाएगा। इसके चलते अधिक से अधिक लोग इक्विटी मार्केट में निवेश कर सकेंगे। इसके अलावा मेंबरशिप और ब्रोकर्स के लिए क्लीयरिंग फीस भी कम करने में मदद मिलेगी।

सेटअप के लिए शुरुआत में प्रमोटर्स 100% हिस्सेदारी रखने की छूट

नए एक्सचेंज के सेटअप के लिए शुरुआत में प्रमोटर्स 100% हिस्सेदारी रख सकते हैं, जिसे अगले 10 साल में घटाकर 51% या 26% कर सकते हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, एक्सचेंज लॉन्चिंग के 10 साल के बाद किसी इंडिविजुअल हिस्सेदारी 25% तक हो सकती है, जो अभी 5% है। वहीं, लॉन्चिंग के 10 साल के अंदर इंस्टीट्यूशंस को अपनी हिस्सेदारी घटाकर 26% करनी होगी

विदेशी एक्सचेंज को ओनरशिप में ढील

सेबी ने कहा कि अगर भारत में विदेशी कंपनी का एक्सचेंज या डिपॉजिटरी लॉन्च होता है, तो शुरुआत में उसकी हिस्सेदारी 49% होगी,जो अगले 10 सालों में घटाकर 26% या 15% करना होगा। हालांकि, वर्तमान में नियमों के मुताबिक एक्सचेंज में 51% हिस्सेदारी पब्लिक की और 49% हिस्सेदारी ट्रेडिंग मेंबर, एसोशिएट और एजेंट का होना आवश्यक होती है। प्रस्ताव में कहा गया है कि एक्सचेंज में फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर में कम से कम पांच सालों के अनुभव वाले कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 50% होगा।



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