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7 दिन पहले

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किशोर बियानी ने कहा है कि अमेजन के साथ विवाद पर सुनवाई और रिलायंस के साथ डील, दोनों साथ चलती रहेंगी। -फाइल फोटो

  • बियानी 24,713 करोड़ रुपए में रिलायंस को बेचना चाहते हैं रिटेल बिजनेस
  • अमेजन को इस पर ऐतराज, फ्यूचर में उसने 2,000 करोड़ का निवेश किया है

सेबी की मंजूरी मिलने के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज और फ्यूचर ग्रुप की डील दो महीने में पूरी हो जाने की उम्मीद है। फ्यूचर ग्रुप के फाउंडर और सीईओ किशोर बियानी ने कहा है कि अमेजन के साथ विवाद पर सुनवाई और रिलायंस के साथ डील, दोनों साथ चलती रहेंगी। बियानी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को अपना रिटेल बिजनेस 24,713 करोड़ रुपए में बेचने की डील की है। अमेजन ने इस पर ऐतराज जताया है।

अमेजन ने 2019 में फ्यूचर कूपन्स की 49% हिस्सेदारी 2,000 करोड़ रुपए में ली थी। डील में एक शर्त यह भी थी कि किसी दूसरी कंपनी के साथ डील करने से पहले फ्यूचर को पहले अमेजन को बताना पड़ेगा। अमेजन के मना करने पर ही फ्यूचर किसी और को होल्डिंग बेच सकेगी।

फ्यूचर लगातार अमेजन के संपर्क में था, पर उन्होंने मदद नहीं की

बियानी के अनुसार कोविड लॉकडाउन के बाद फ्यूचर ग्रुप का बिजनेस बुरी तरह प्रभावित हुआ। कर्ज भी काफी बढ़ गया था। हम तब से अमेजन के संपर्क में थे। लेकिन उन्होंने हमारी मदद नहीं की। रिलायंस के साथ बातचीत शुरू हुई तो उसकी जानकारी भी उन्हें दी गई। मामला कोर्ट में जाने के बाद से हम उनसे बात नहीं कर रहे हैं। अमेजन के प्रवक्ता ने बियानी की बात का खंडन किया है। उन्होंने कहा, यह कहना गलत है कि अमेजन ने फ्यूचर रिटेल की मदद नहीं की।

अमेजन का निवेश सिर्फ कूपन और गिफ्ट बिजनेस में

बियानी का कहना है कि अमेजन ने 2019 में फ्यूचर रिटेल की पेरेंट कंपनी फ्यूचर कूपंस में निवेश किया था। यह निवेश सिर्फ कूपन और गिफ्ट बिजनेस में था। रिलायंस को रिटेल बिजनेस बेचने के बाद भी यह निवेश जारी रह सकता है।

आर्बिट्रेशन कोर्ट ने डील पर रोक लगाई है

अमेजन ने फ्यूचर-रिलायंस डील के खिलाफ सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर में याचिका दायर की थी। आर्बिट्रेशन सेंटर ने 25 अक्टूबर को फ्यूचर-रिलायंस डील पर रोक लगा दी। लेकिन फ्यूचर का कहना है कि आर्बिट्रेशन सेंटर का फैसला उस पर लागू नहीं होता।

फ्यूचर ने सेबी से जल्दी मंजूरी देने का आग्रह किया है

डील को कंपटीशन कमीशन (सीसीआई) की मंजूरी मिल चुकी है। फ्यूचर ने सेबी से जल्दी मंजूरी देने का आग्रह किया है। बियानी के अनुसार सेबी की मंजूरी के बाद हमें कर्ज देने वाले बैंकों और शेयरहोल्डर्स की मंजूरी लेनी पड़ेगी। सेबी की मंजूरी के बाद 45 से 60 दिनों में डील पूरी हो जाने की उम्मीद है।



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