वो हिंदू, जो अयोध्या में


सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले के बाद पिछले साल राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण (Ram Janma Bhoomi Mandir) का रास्ता साफ हुआ, तो बाबरी मस्जिद के वै​कल्पिक निर्माण के लिए भी धन्नीपुर में पांच एकड़ का परिसर (Dhannipur Masjid Complex) तय हुआ. नई बाबरी मस्जिद या धन्नीपुर मस्जिद कॉम्प्लेक्स में म्यूज़ियम, कम्युनिटी किचन (Community Kitchen) और लाइब्रेरी जैसे निर्माणों के लिए क्यूरेटर के तौर पर प्रोफेसर पुष्पेश पंत (Prof Pushpesh Pant) की नियुक्ति हुई. इससे पहले कि हम पद्मश्री से सम्मानित पुष्पेश पंत के बारे में आपको बताएं, मस्जिद कॉम्प्लेक्स के बारे में उनके कुछ अहम विचार जानें.

फिलहाल मस्जिद के भीतर कम्युनिटी किचन के बारे में योजना को लेकर फूड एक्सपर्ट पंत बताते हैं कि इस कम्युनिटी किचन में 365 तरह के वेज और नॉन वेज पकवान परोसे जाने की योजना है. साथ ही, पंत के मुताबिक मस्जिद का कम्युनिटी किचन गरीबों के लिहाज़ से बहुत ही मामूली कीमत पर भोजन परोसेगा. देश भर के इलाकों के भोजन के इतिहास पर प्रामाणिक अध्ययन करने वाले पंत के बारे में जानना काफी दिलचस्प है.

कौन और क्या हैं पुष्पेश पंत?
भारत के चर्चित और सम्मानित शिक्षक, फूड एक्सपर्ट और इतिहासकारों में पंत का नाम शुमार किया जाता है. दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल रिलेशन विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख रह चुके पंत अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर लगातार लेखन और वार्ता करते रहे हैं. एक कॉलम लेखक के तौर पर पंत कई प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं के साथ जुड़े रहे हैं.ये भी पढ़ें :— अयोध्या मस्जिद के म्यूज़ियम, लाइब्रेरी और किचन की थीम क्या होगी?

अपनी किताबों से पाई शोहरत
साल 2011 में छपी किताब इंडिया: द कुकबुक से पंत को प्रामाणिक फूड एक्सपर्ट के तौर पर ख्याति मिली. न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस किताब को उस साल की सबसे बेहतरीन कुकबुक करार दिया था. फूड एक्सपर्ट के तौर पर उन्होंने कई लेख और टीवी शोज़ के लिए योगदान दिया. ‘राजा रसोई और अन्य कहानियां’ जैसा टीवी शो भी पंत की परिकल्पना का ही एक विस्तार माना गया.

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पंत की किताब को 2011 की सबसे अच्छी कुकबुक माना गया था. किताब की तस्वीर अमेज़न से साभार.

इसके अलावा, दि ऑस्ट्रेलियन ने पंत का इंटरव्यू किया था और 2016 में उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री से नवाज़ा था. भोजन, भारत के अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और पर्यटन आदि विषयों पर करीब एक दर्जन किताबों के लेखक पंत को पिछले दिनों ही उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के बनाए ट्रस्ट इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ने मस्जिद कॉम्प्लेक्स के क्यूरेटर की ज़िम्मेदारी सौंपी.

बचपन से मिली ‘भोजन’ की शिक्षा
देश ही नहीं, दुनिया भर में फूड एक्सपर्ट और क्रिटिक के तौर पर पहचाने जाने वाले पंत इस कला का श्रेय अपने माता पिता को दे चुके हैं. पंत के मुताबिक उनके पिता एक डॉक्टर थे, जिन्होंने बचपन से ही उन्हें भोजन से उपचार के तरीकों के बारे में बताया. वहीं, उनकी मां कई राज्यों की पाककला पर महारत रखती थीं और उन्होंने सीख दी थी कि ‘हिंदोस्तान को जानने का ज़रिया भोजन ही है.’

पंत के मुताबिक उन्हें बचपन से ही पाक कला के बारे में बहुत से पहलू जानने को मिले. भोजन की केमिस्ट्री, भोजन की साइकोलॉजी और समाजशास्त्र की परिकल्पनाएं पंत के लिए काफी अहम हैं और वो इस पर अफसोस जताते हैं कि लोग भोजन के पूरे महत्व को समझने में दिलचस्पी नहीं लेते.

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बेटे के साथ एक फूड फिल्म
कुछ समय पहले द हिंदू को दिए एक इंटरव्यू में पंत ने बताया था कि भोजन और पाककला को लेकर उनके प्रेम और अध्ययन से उनका बेटा भी प्रभावित हुआ. चूंकि पंत का बेटा एक सिनेमैटोग्राफर है, इसलिए वो अपने बेटे के साथ एक फूड फिल्म पर काम कर रहे थे. तब उन्होंने यह भी कहा था कि यह काफी बड़ा प्रोजेक्ट था इसलिए जल्दी पूरा नहीं होगा.

भोजन को लेकर पंत का नज़रिया
अस्ल में, पुष्पेश पंत को सबसे ज़्यादा उनके भोजन संबंधी ज्ञान के कारण ही शोहरत मिली है. अपनी गहन रिसर्च और देश भर के भोजन के बारे में अहम एंगल देने वाले पंत कहते हैं ‘जीवन में दो ही चीज़ें सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं : भोजन और सेक्स. और इस मामले में यह अहम है कि अगर कोई व्यक्ति ठीक तरह से पोषित ही नहीं है, तो वह सेक्स के बारे में ठीक से सोच भी नहीं सकता.’





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